पत्रकारिता के इस कॉलम में आज की पोस्ट इंटरव्यू अथवा साक्षात्कार पर हम बात करेंगे। पत्रकार के लिए इंटरव्यू महत्वपूर्ण विषय है, लेकिन इसकी बारीकियां जानना आम पाठक के लिए भी बेहतर है। भले वह किसी अखबार या मीडिया माध्यम के लिए काम नहीं करता हो, लेकिन जिंदगी में वह भी दूसरों से नहीं तो अपनों का ही इंटरव्यू तो लेता ही है। इसी परिप्रेक्ष्य में एक अच्छे साक्षात्कार के लिए जरूरत और ध्यान देने वाली बातों का सार काफी मंथन के बाद प्रस्तुत है।
इंटरव्यू और साइकॉलोजी का परस्पर संबंध है। इंटरव्यू लेने वाले को सबसे पहले तो सामने वाले को समझने की जरूरत होती है। उसकी साइकॉलोजी के आधार पर ही इंटरव्यू लिया जाए तो वह सफल मायने रखता है। इंटरव्यू हमारे बारे में नहीं होता, इसलिए इसमें हमारे विचार कभी नहीं जोड़ने चाहिए। प्रश्न बड़े हो सकते हैं। इसमें जानकारियां भी जुटाकर जोड़नी चाहिए। लेकिन, स्वयं के विचार हावी न हो जाए, यह ध्यान रखना भी जरूरी है।
घिसे-पिटे प्रश्नों को पूछने से बचने के साथ ही रूटीन के प्रश्न नहीं पूछने चाहिए। इससे हो सकता है इंटरव्यू देने वाले की रुचि कम हो जाए। इसके लिए बेहतर तरीका यही है कि हम जिसका इंटरव्यू लेने जा रहे हैं, उसके संबंध में पूरी जानकारी जुटा दें। प्रश्न किस विषय में पूछने हैं, उसकी पूरी तैयारी करके इंटरव्यू लेना ही बेहतर रहता है। खासकर इस दौरान हमारा परिधान भी मायने रखता है। एक अलग पहचान आकर्षिक करती है। इससे हमारे प्रश्नों को तवज्जो भी ज्यादा मिलती है। हमारा व्यक्तित्व इंटरव्यू देने वाले पर प्रभावी होता है।
अच्छे इंटरव्यू के अति उत्साही और ओवर स्मार्ट को कोसों दूर रखना ही फायदेमंद है। अनावश्यक एटीट्यूड एक सफल इंटरव्यू को रोक सकता है। ज्वलंत और संवदेनशील मुद्दों के लिए सहानुभूति रखना जरूरी होता है। जरूरत से ज्यादा निर्देश देने से भी बचना चाहिए। कठिन प्रश्नों से पूछने से पहले सहमति लेना बेहतर रहता है।
राय मनवाने से बचें- अक्सर देखा गया है कि इंटरव्यू लेने वाला यह चाहता है कि वह जो कहे वो सामने वाला स्वीकार कर ले, लेकिन यह गलत है। हमें निष्पक्ष बनना है। हमारे विचारों को निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करता है। हमारी राय को मनवाने से बचना चाहिए। किसी भी विषय में न तो हमें हमारा निर्णय लेना है और ना ही तीखी समीक्षा करनी है। हमारा हक केवल पूछना है, सामने वाले का बताना।
अक्सर अंतिम क्षणों में मिलती है बेहतर जानकारी : यह भी एक आश्चर्य है। अक्सर देखा गया है कि इंटरव्यू पूरा लेने के बाद जब हम हमारी डायरी या रिकॉर्डर दूर रख देते हैं, तब बड़ी जानकारी मिल जाती है। इंटरव्यू देने वाले उस समय हमारे बीच घुल-मिल जाता है और उस वजह से वह अंतिम क्षणों में बड़ी जानकारी दे देता है। इसलिए इंटरव्यू पूरा होने के बाद तुरंत चलते न बनें। थोड़ी देर रुकें। यह बात जरूरी है कि आप विनम्र बने रहें।
प्रश्न छूट जाए तो - कई बार इंटरव्यू खत्म होने के बाद ख्याल आता है कि यह प्रश्न तो पूछना ही रह गया या यह प्रश्न पूछा जाना चाहिए था। उस समय विनम्रता से इंटरव्यू देने वाले से बातचीत करने लग जाएं। और बातों बातों में ही वह प्रश्न पूछ लेना चाहिए।
bahot acha
ReplyDeleteThanks ji
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