भारत में भाषाई पत्रकारिता वर्षों से चली आ रही है। पत्रकारिता के विकास
के साथ उसका वर्गीकरण भी हुआ। अर्थात् क्षेत्र, वर्ग या हम कह सकते हैं कि
आयु के अनुसार भी पत्रकारिता होने लगी।
इसके अलावा महिलाओं के लिए अलग से प्रकाशित होती हैं। इस पर महिला विमर्श पर काफी बल दिया जाता है।
- अमित शाह
भाषा पर विभाजन
इस देश में संविधान से मान्यता प्राप्त 22 राष्ट्रीय भाषाएं हैं। संस्कृत, अंग्रेजी, उर्दू यहां पर काफी प्रचलित हैं। अक्सर देखा जाता है कि हिंदी, बांग्ला, ओडिया, पंजाबी, मराठी, गुजराती, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम कश्मीरी, नेपाली, हिंदी, मैथिली, कोंकणी, मणिपुरी आदि भाषाओं में पत्र पत्रिका प्रकाशित हो रही है।विषयानुसार विभाजन
भारत में हर विषय संबंधित पत्र पत्रिकाएं मिल जाएंगे। जैसे समाचार पत्र, साहित्यिक, आर्थिक, राजनीतिक धार्मिक, वैज्ञानिक और तकनीकी, व्यावसायिक, खेलकूद और मनोरंजन, चिकित्सक एवं पर्यावरण संबंधित, विधिक या कानूनी, ज्योतिष, संस्थापक विकास पत्रकारिता, विचार पत्रकारिता, शोध पत्र, अपराध पर खोजी पत्रकारिता, घरेलू पत्रकारिता।क्षेत्र के अनुसार वर्गीकरण
देश में प्रकाशित समाचार पत्रों और पत्रिकाओं को उनके क्षेत्र के अनुसार भी बांटा गया है। ग्रामीण एवं कस्बाई, देश-देशांतर से संबंधित।इसके अलावा महिलाओं के लिए अलग से प्रकाशित होती हैं। इस पर महिला विमर्श पर काफी बल दिया जाता है।
आयु परक विभाजन
इसमें 3 रूप मुख्य रूप से दिखते है। बाल उपयोगी, युवा पत्रकारिता और नवसाक्षरों के लिए पत्र।माध्यमों के अनुसार विभाजन
यहां मुद्रित माध्यम और
इलेक्ट्रॉनिक माध्यम, जैसे रेडियो और टेलीविजन, इंटरनेट के रूप में प्रायः
हर भाषा में पर्याप्त मात्रा में विकसित हो चुके हैं।
प्रस्तुति के अनुसार
भारतीय पत्र-पत्रिकाएं हस्तलिखित, चक्र मुद्रित के साथ-साथ वीडियो टीवी और इंटरनेट से भी प्रसारित होती है।स्तर के अनुसार विभाजन
स्तर के अनुसार विभाजन भारतीय भाषाओं में अल्पकालीन लघु पत्र पत्रिकाओं की भरमार है। दूसरी ओर प्रतिदिन 2 करोड़ प्रतियां छापने वाले बड़े स्तर के समाचार पत्र भी यहां है।अवधि परक विभाजन
दैनिक, साप्ताहिक और दो दिवसीय, पाक्षिक, मासिक, द्धि मासिक, त्रैमासिक, छमाही, वार्षिक और अनियत कालिक पत्रिकाएं भी शामिल है।स्वामित्व के अनुसार विभाजन
सरकारी और अर्द्ध सरकारी, गैर सरकारी, निजी और संस्थागत पत्रिकाएं प्रचलित है। कभी-कभी अज्ञात भूमिका तथा नीली पत्रिका भी दिख रही है।आकार-गत विभाजन
भारतीय समाचारपत्र कई आकारों में निकलते हैं। अखबारी साइज के अलावा यहां डाइजेस्ट, रॉयल काउन, डिमाई और टेब्लायड आकार काफी प्रचलित है। पोस्ट-कार्ड और अंतर्देशीय और पोस्टर यानि भीति पत्रकारिता भी पाई जाती है।- अमित शाह
