सरल भाषा ज्यादा प्रभावशाली


लेख हो या समाचार सरल भाषा ही उसको ज्यादा प्रभावशाली बना सकती है। क्लिष्ट भाषा शब्दों को बोझिल बना देती है। वह शब्द की तारतम्यता को जोड़ने की बजाए कम करने में सहायक बन जाती है और लेखक कभी यह नहीं चाहेगा।
बेहतर लेख लिखने के लिए सरल भाषा सबसे सुगम उपाय है। लेखक अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए कई बार मुहावरों का प्रयोग करता है, लेकिन यह मुहावरे इतने जटिल बन जाते है कि उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता। 

सरल भाषा के लिए छोटे-छोटे वाक्य लिखने के प्रयास होने चाहिए । साहित्यकारों के लिए यह विषय कुछ हद तक अलग हो सकता है, लेकिन मीडिया क्षेत्र में सरल भाषा बेहतर रिजल्ट दे सकती है।
आप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही देखिए । उनकी भाषा सरल और आम बोलचाल वाली है। वह आसानी से अपने विचारों को रख देते हैं। यानि जितने आसान शब्द होंगे, उतना ही पाठकों और श्रोताओं के लिए समझना आसान होगा।
अक्सर देखा गया है कि लंबे पैराग्राफ और बढा-चढा कर लिखना पाठकों को पसंद नहीं आता। ज्यादातर लेखक मानते हैं कि गंभीर मसलों पर कठिन शैली और भाषा जरूरी होती है। जबकि उसे इतना सरल भाषा में लिखना चाहिए कि पाठक इसके हर पहलू को आसानी से समझ सके।
मीडिया सेक्टर में आजकल छोटे वाक्यों और सरल भाषा पर ही जोर दिया जा रहा है। मीडिया सेक्टर अपने कर्मचारियों को सरल भाषा के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दे रहा है, ताकि वह अखबार को इतना सरल बना सके कि पाठक हर खबर पर टिक सके। उसे समझने में ज्यादा दिमाग नहीं लगाना पड़े। क्योंकि पाठक को खबर पढ़ने के लिए दिमाग लगाना पड़ा तो वह हमारे अखबार या मैग्जीन को पूरा पढ़े, यह संशय भरा रहेगा। सरल भाषा होगी तो समय कम लगेगा, जिस वजह से वह हमारे प्रॉडक्ट की अन्य सामग्री भी पढ़ सकेगा।
हमारे प्रॉडक्ट पर ज्यादा से ज्यादा समय पाठक बिताए, इसके लिए सरल भाषा और छोटे-छोटे वाक्यों का इस्तेमाल करना जरूरी हो जाता है।



4 comments:

  1. पत्रकार वास्तव में आम व्यक्ति की आवाज को मुखर करता है , सरल शब्द और भाषा का उपयोग जरुरी है ।

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  2. भाषा की सरलता और आमजन में प्रचलित शब्दो का चयन आलेख को प्रभावी बनाता है।

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