एक बेहतर प्रेस विज्ञप्ति लिखें, जिससे पत्रकार भी आकर्षित हों

आजकल अक्सर अखबारों के दफ्तरों में प्रेस विज्ञप्ति को लेकर शिकायत आती हैं, जिसमें नहीं छपना, छोटी छपना वगैरह-वगैरह शामिल है। इसके पीछे खराब प्रेस रिलीज़ करना भी शामिल है।
आमलोगों का जवाब रहता है कि यह काम तो पत्रकार ही कर सकते हैं। लेकिन, वाकई में यह तो पत्रकार का काम ही नहीं। वह तो खबर लिखेगा। प्रेस रिलीज तो आम पाठक का ही नजरिया है।
प्रेस विज्ञप्ति लिखना आसान है। इसमें केवल कुछ तथ्यों पर पकड़ होना जरूरी है। हिंदी की समझ रखने वाला व्यक्ति यह आसानी से यह कर सकता है। यहां मैं मात्राओं का दोष कहीं भी नहीं मढ़ रहा।
आप जो प्रेस विज्ञप्ति लिख रहे हो, उसका मीडिया टारगेट पता लगाएं। यानी कोई साप्ताहिक अख़बार है, इसमें आप एक ही संगठन की 3-4 दिन के अंतराल में 2-3 खबरें रिलीज करोगे तो वो प्रकाशित एक ही करेगा। आप लोकल आयोजन को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में रिलीज करोगे तो हो सकता है वहां टेलीकास्ट न हो।
खबर पहले से ही छोटी बनाएं। आवश्यक बिंदुओं को ही जगह दें। आंकड़े जरूर शामिल करें। आप बैठक की खबर ही बना रहे हो तो उसमें नई बात पहले लिखें, ताकि पत्रकार इस पर रुके और उसे रोचक लगे। रिलीज के अंत में अपने दल का नाम, कॉन्टैक्ट नंबर, -मेल भी लिखें। खासकर यह ध्यान रखें कि जो फोटो आप दे रहे हो वह हाई रिसोल्यूशन हो। पत्रकार को कभी मांगने का मौका नहीं दें।
प्रेस रिलीज करना एक प्रकार से पीआर का काम करना ही है। इसलिए इसमें सही तरीका और आवश्यक बातें ही होनी चाहिए, ताकि पत्रकार इससे आकर्षित हो और उस रिलीज को अच्छी जगह मिल सके।
कई बार प्रेस रिलीज में नामों पर भी बड़ी दिक्कत होती है। कई विज्ञप्तियों में नाम पहले और खबर बाद में होती है। यह बिल्कुल गलत है। नाम अंत में ही डालें। खासकर नाम प्रमुख हो वही लिखें। अक्सर देखा गया है कि खबर दो लाइन की और नाम पांच लाइन में लिखे होते हैं। ढेरों नाम आपकी रिलीज को बिगाड़ देती है। कम नाम और अधिक जानकारी वाली विज्ञप्ति को हर अखबार में अच्छी जगह मिलती है।
मैं इसे उदाहरण स्वरूप समझाना चाहूंगा। न्यूज रूम में हमेशा पत्रकार खबर की खोज के लिए विचाराधीन होता है। अक्सर प्रेस रिलीज इसमें उनको सहयोग भी करती है। जैसे एक बैठक की खबर है, जिसमें लिखा गया है कि अमुक समाज की बैठक इस दिन होगी। इसमें यह अतिथि भाग लेंगे। लेकिन, वास्तव में यह होना चाहिए कि इस बैठक को आयोजित करने के क्या कारण हैं। इसमें कोई ऐसा कारण भी हो दूसरी समाजों के लिए भी प्रेरणा बन सके तो वह बड़ी खबर का रूप ले लेगी। कभी-कभी बैठक में भी बड़े निर्णय लिए जाते हैं। लेकिन, प्रेस रिलीज में हम महज चार-पांच शब्दों में इसे बता देते हैं, जिसकी वजह से वह निर्णय अन्य समाजों के सामने नहीं आ पाते। इसलिए यह छोटी-छोटी बातें प्रमुखता से ली जाए तो प्रेस रिलीज अच्छी जगह बना सकती है।

एक उदाहरण :
पहले यह खबर प्रेस रिलीज के माध्यम से प्रकाशित हुई थी। 


 यहां की एक लाइन से हमने दूसरी खबर निकाली। 


 
विचारों की तारतम्यता जारी रहेगी...

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