पत्रकारिता : यह एक सभ्य व्यवसाय है। जिसमें जुनून आवश्यक है। पत्रकारिता शब्द हमारे जहन
में आते ही हमें अखबार की दुनिया याद आती है। बेशक, आए भी क्यों नहीं।
पत्रकारिता विषय विस्तृत है। इसमें एक ही नहीं समूचा उससे जुड़े हुए कई
व्यवसाय है। फिल्म उद्योग भी इस शब्द की परिक्रमा से ही चलता है।
पत्रकारिता का मतलब सिर्फ अखबार से जोड़ना गलत ही होगा। यह भी अनंत सागर है।
इसी वजह से आज के दौर में हम देखे तो हर शहर में पत्रकारिता की पढ़ाई करते
हुए या करने वाले मिल जाएंगे। हम यदि 10-15 साल पहले के दौर मे जाए तो हम
यह बता सकते हैं कि उन दिनों में पत्रकारिता के विद्यार्थी कम ही मिलते थे।
जो पत्रकार थे, वह भी हिंदी के शब्दों में पकड़ बनाने वाले महारथी थे। यह
जरूरी नहीं था कि वह भी पत्रकारिता विषय से ही निकले हो। आज भी कई
शख्सियतें ऐसी हैं कि जिनकी पढ़ाई में पत्रकारिता विषय कोसों दूर था, लेकिन
वह आज बड़े पत्रकारों में शामिल है। अखबार की दुनिया में शब्दों की पकड़
अच्छी होना जरूरी है। अभी भी बड़े मीडिया ब्रांड स्नातक युवक को मीडिया
घराने में मौका देते हैं। यहां पर यह मुद्दा नहीं होता है कि वह पत्रकारिता
के बैकग्राउंड से है या नहीं। बस, शर्तें एक ही होती है कि उनमें शब्दों
की पकड़ और खबरों को सूंघने की क्षमता होनी चाहिए।
कई लोग खबर उसे ही मानते हैं जिसमें खोज हो। लेकिन यह जरूरी नहीं। खबर तो वो है जो हमें खबर दे। सूचना दे। चाहे वह खोजपूर्ण हो या सूचना परक। उसका विषय भ्रष्टाचार जैसे बड़े विषय से लेकर समाज की एक छोटी बैठक भी हो सकती हैं। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में पत्रकारिता ने विस्तृत रूप ले लिया है। इसी वजह से इसकी सामान्य जानकारियां होनी जरूरी है। मीडिया के अलावा सरकारी महकमों में भी एक नई पोस्ट बनाई गई है। जिसे आईईसी कहा जाता है। जिसका विस्तृत रूप इनफॉर्मेशन, एजुकेशन और कम्यूनिकेशन है। इसके लिए बीजे और पत्रकारिता में डिप्लोमा अभ्यर्थी को मौका दिया जाता है। इसके अलावा सूचना निदेशक कार्यालय तो है ही, जिसमें पत्रकारिता से जुड़े विद्यार्थियों को मौका दिया जाता है। इसी संदर्भ में हम आज अखबार के संपादकीय विभाग में लेखन के लिए क्या टिप्स होने चाहिए, इस पर चर्चा करेंगे -
संपादकीय लेखन का मतलब सिर्फ समाचार लिखने से नहीं होना चाहिए। आजकल समाचारपत्र को बाजार में बने रहने के लिए उच्च क्वालिटी की खबरें प्रस्तुत करना जरूरी होता है। संपादकीय टीम का मूल उद्देश्य लोगों को किसी मुद्दे पर जागृत करना, उसके विचारों को प्रभावित करना और सोच को विकसित करना भी है।
हर समाचार में यह वस्तुएं होनी जरूरी होती हैं :
1. प्रस्तावना, मुख्य भाग और खबर का निष्कर्ष
2. गंभीर मसलों पर उस विषय का तर्क
3. समयानुसार खबर देना। (खबरों में समय की पाबंदी जरूरी है। क्योंकि इसमें लापरवाही हमें प्रतिद्बंद्बी से पीछे करने में प्रमुख बन सकती है)
4. मुद्दों के संभावित हल। यह ऐसे हो कि जो मजबूती प्रदर्शित करते हो।
5. प्रोफेशनल तरीके से प्रस्तुत किए गए लेखक के विचार।
- संपादकीय टीम की लेखन से ही उसकी क्षमता का भी अहसास आम पाठक को होता है। उससे यह साबित होता है कि संपादकीय मुद्दों को किसी नजर से देखता है। इसलिए बड़े मुद्दों और बड़ी खबरों में अतिरिक्त जानकारियां जरूरी होती है। जैसे कोई नई रेल शुरू हो रही है तो उस रेल के अलावा उस रूट पर चलने वाली अन्य रेलों की भी जानकारी। उस स्टेशन से गुजरने वाली रेलों की संख्या आदि-आदि।
- हर समस्या को उजागर कर संपादकीय टीम का यह उद्देश्य नहीं होता कि उस माध्यम से हल किया जाए। पहला उद्देश्य ऐसी समस्या को लाना है जो पाठक को भी मालूम न हो। अपनी खबर से उसे जानकारी मिले कि यह बड़ी समस्या भी हमारे आसपास ही थी। हां, हमें खबर ऐसी बनानी है कि इसमें लगना चाहिए कि हम इसके समाधान के लिए भी अग्रसर है।
- संपादकीय की शैली और प्रस्तुति पाठक को आकर्षित करती है। पाठक को जोड़ती है। यह सकारात्मकता के लिए प्रेरित करती है।
- अमित शाह
कई लोग खबर उसे ही मानते हैं जिसमें खोज हो। लेकिन यह जरूरी नहीं। खबर तो वो है जो हमें खबर दे। सूचना दे। चाहे वह खोजपूर्ण हो या सूचना परक। उसका विषय भ्रष्टाचार जैसे बड़े विषय से लेकर समाज की एक छोटी बैठक भी हो सकती हैं। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में पत्रकारिता ने विस्तृत रूप ले लिया है। इसी वजह से इसकी सामान्य जानकारियां होनी जरूरी है। मीडिया के अलावा सरकारी महकमों में भी एक नई पोस्ट बनाई गई है। जिसे आईईसी कहा जाता है। जिसका विस्तृत रूप इनफॉर्मेशन, एजुकेशन और कम्यूनिकेशन है। इसके लिए बीजे और पत्रकारिता में डिप्लोमा अभ्यर्थी को मौका दिया जाता है। इसके अलावा सूचना निदेशक कार्यालय तो है ही, जिसमें पत्रकारिता से जुड़े विद्यार्थियों को मौका दिया जाता है। इसी संदर्भ में हम आज अखबार के संपादकीय विभाग में लेखन के लिए क्या टिप्स होने चाहिए, इस पर चर्चा करेंगे -
संपादकीय लेखन का मतलब सिर्फ समाचार लिखने से नहीं होना चाहिए। आजकल समाचारपत्र को बाजार में बने रहने के लिए उच्च क्वालिटी की खबरें प्रस्तुत करना जरूरी होता है। संपादकीय टीम का मूल उद्देश्य लोगों को किसी मुद्दे पर जागृत करना, उसके विचारों को प्रभावित करना और सोच को विकसित करना भी है।
हर समाचार में यह वस्तुएं होनी जरूरी होती हैं :
1. प्रस्तावना, मुख्य भाग और खबर का निष्कर्ष
2. गंभीर मसलों पर उस विषय का तर्क
3. समयानुसार खबर देना। (खबरों में समय की पाबंदी जरूरी है। क्योंकि इसमें लापरवाही हमें प्रतिद्बंद्बी से पीछे करने में प्रमुख बन सकती है)
4. मुद्दों के संभावित हल। यह ऐसे हो कि जो मजबूती प्रदर्शित करते हो।
5. प्रोफेशनल तरीके से प्रस्तुत किए गए लेखक के विचार।
- संपादकीय टीम की लेखन से ही उसकी क्षमता का भी अहसास आम पाठक को होता है। उससे यह साबित होता है कि संपादकीय मुद्दों को किसी नजर से देखता है। इसलिए बड़े मुद्दों और बड़ी खबरों में अतिरिक्त जानकारियां जरूरी होती है। जैसे कोई नई रेल शुरू हो रही है तो उस रेल के अलावा उस रूट पर चलने वाली अन्य रेलों की भी जानकारी। उस स्टेशन से गुजरने वाली रेलों की संख्या आदि-आदि।
- हर समस्या को उजागर कर संपादकीय टीम का यह उद्देश्य नहीं होता कि उस माध्यम से हल किया जाए। पहला उद्देश्य ऐसी समस्या को लाना है जो पाठक को भी मालूम न हो। अपनी खबर से उसे जानकारी मिले कि यह बड़ी समस्या भी हमारे आसपास ही थी। हां, हमें खबर ऐसी बनानी है कि इसमें लगना चाहिए कि हम इसके समाधान के लिए भी अग्रसर है।
- संपादकीय की शैली और प्रस्तुति पाठक को आकर्षित करती है। पाठक को जोड़ती है। यह सकारात्मकता के लिए प्रेरित करती है।
- अमित शाह
शानदार , विषय वस्तु श्रेष्ठ है , प्रस्तुतीकरण भी लाज़वाब है । बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं
ReplyDeleteनवोदित पत्रकारों के साथ ही प्रोफेशनल्स के लिए बेहतर और बेहद उपयोगी टिप्स nice bro , keep it up
ReplyDeleteआपसे भी काफी कुछ सीखा है।
DeleteKeep it up mama
ReplyDelete